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हनुमान आरती: आरती कीजै हनुमान लला की (हिंदी लिरिक्स)

December 3, 2025 · Admin
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हनुमान आरती: आरती कीजै हनुमान लला की (हिंदी लिरिक्स)
Aarti · भक्ति गीत

आरती कीजै हनुमान लला की

🕓 पाठ समय: ~2 मिनट 🙏 हनुमान जी की आरती
हनुमान जी की आरती - आरती कीजै हनुमान लला की

आरती कीजै हनुमान लला की — हनुमान जी की प्रसिद्ध आरती

"आरती कीजै हनुमान लला की" हनुमान जी की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसमें हनुमान जी के बल, साहस और श्रीराम भक्ति का वर्णन है — लंका दहन, लक्ष्मण जी को संजीवनी बूटी लाकर बचाना, और अहिरावण वध जैसे प्रसंग इसमें समाहित हैं।

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यह आरती अधिकतर मंदिरों और घरों में हनुमान पूजा के समय गाई जाती है। नीचे संपूर्ण हिंदी पाठ दिया गया है।

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी।
संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारी सिया सुध लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठी पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।
जो हनुमानजी की आरती गावै।
बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
पाठ विधि: यह आरती सामान्यतः दीपक और कपूर के साथ गाई जाती है, विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को। आरती के बाद हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

"आरती कीजै हनुमान लला की" किसने लिखी है?

यह आरती परंपरागत रूप से गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ी मानी जाती है, हालांकि इसके रचयिता को लेकर लोक-परंपरा में अलग-अलग विवरण मिलते हैं।

यह आरती कब गाई जाती है?

इसे आमतौर पर हनुमान पूजा, मंगलवार और शनिवार के दिन, तथा हनुमान जयंती जैसे विशेष अवसरों पर गाया जाता है।

क्या इस आरती के साथ हनुमान चालीसा भी पढ़नी चाहिए?

कई भक्त आरती से पहले या बाद में हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, यह व्यक्तिगत श्रद्धा और परंपरा पर निर्भर करता है।

हनुमान चालीसा का पाठ भी नियमित रूप से करें।

हनुमान चालीसा पढ़ें →
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