आरती कीजै हनुमान लला की
आरती कीजै हनुमान लला की — हनुमान जी की प्रसिद्ध आरती
"आरती कीजै हनुमान लला की" हनुमान जी की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है। इसमें हनुमान जी के बल, साहस और श्रीराम भक्ति का वर्णन है — लंका दहन, लक्ष्मण जी को संजीवनी बूटी लाकर बचाना, और अहिरावण वध जैसे प्रसंग इसमें समाहित हैं।
यह आरती अधिकतर मंदिरों और घरों में हनुमान पूजा के समय गाई जाती है। नीचे संपूर्ण हिंदी पाठ दिया गया है।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
संतान के प्रभु सदा सहाई।।
लंका जारी सिया सुध लाए।।
जात पवनसुत बार न लाई।।
सियारामजी के काज संवारे।।
आणि संजीवन प्राण उबारे।।
अहिरावण की भुजा उखाड़े।।
दाहिने भुजा संतजन तारे।।
जै जै जै हनुमान उचारे।।
आरती करत अंजना माई।।
तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।
बसी बैकुंठ परमपद पावै।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
"आरती कीजै हनुमान लला की" किसने लिखी है?
यह आरती परंपरागत रूप से गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ी मानी जाती है, हालांकि इसके रचयिता को लेकर लोक-परंपरा में अलग-अलग विवरण मिलते हैं।
यह आरती कब गाई जाती है?
इसे आमतौर पर हनुमान पूजा, मंगलवार और शनिवार के दिन, तथा हनुमान जयंती जैसे विशेष अवसरों पर गाया जाता है।
क्या इस आरती के साथ हनुमान चालीसा भी पढ़नी चाहिए?
कई भक्त आरती से पहले या बाद में हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, यह व्यक्तिगत श्रद्धा और परंपरा पर निर्भर करता है।
हनुमान चालीसा का पाठ भी नियमित रूप से करें।
हनुमान चालीसा पढ़ें →